ऐसा वादा न कर मुझसे की तू
निभा न सके,
इतना दूर न जा की कभी मुझ पे
हक़ जता न सके,
गलत्फेमियों से न लगा नफरत
की आग,
की चाह कर भी तू बुझा न सके,
न खीच दिल के आईने पे कुछ
ऐसी रेखाएं जो चेहरा बदल दे,
की अपनी ही सूरत तू धडकनों
को कभी दिखा न सके,
न बांध ज़माने के रिश्तों
में मासूम प्यार को तू आज,
की कल खुदा सी मोहब्बत के
जस्बातों को तू कुछ समझा न सके,
है दम तेरी नफरत में तो छोड़
दे तस्बूर में भी मेरा ख्याल,
कहीं ऐसा न हो एक पल के लिए
भी तेरी साँसे मुझे भुला न सके,
नामो निशा भी न छोड़ तू मेरी
किसी निशानी का अपने पास,
लेकिन वक़्त के हाथ तेरे
चेहरे से मेरे प्यार का निशा मिटा न सके,
इंसा से लेके खुदा तक सबने
जिसे मिटाना चाहा
ऐसी मोहब्बत को भुलाने के
लिए हम खुद को मार न सके,
न कर इतना शर्मिंदा मेरी
मोहब्बत को आज,
की कल तू इस इश्क को अपने
दिल के महल में सजा न सके.
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